जिला - बलौदा बाजार ( छ. ग )
विधा - छंद मुक्त कविता
अलंकार - निदर्शना अलंकार
शीर्षक - पितृ पक्ष
सर्वहितैषी धर्म हमारा ,
हिन्दू जीवन दर्शन प्यारा ।
सत्य सनातन संस्कृति न्यारी ,
मान रही अब दुनिया सारी ।
जीते - जी कर्तव्य निभाते ,
मृत्यु बाद भी सेवा करते ।
आश्विन कृष्ण पक्ष जब आते ,
दादा - दादी पूर्वज पधारते ।
श्रद्धा भाव से करके याद ,
हम सब करते तर्पण श्राद्ध ।
ऐसी सुंदर परम्परा यह ,
नहीं मिलेगा और कहीं जगह ।
भारतीय रुपया अमेरिका जाकर ,
होते ज्यों परिवर्तित डालर ।
उसी तरह श्राद्ध का प्रतिफल ,
पितरों को मिलता है अटल ।
शंका का कोई प्रश्न नहीं है ,
ज्यों प्रमाणित विज्ञान सही है ।
सुख - शांति और अच्छी संतति ,
मिलते आशीर्वाद पितरों की ।
बड़े - बुजुर्गों का यह सम्मान ,
भारतीयों की है पहचान ।
संयुक्त परिवार में सबकी संभाल ,
वृद्धाश्रम तो विदेशी ख्याल ।
फिर भी ढोंग - आडम्बर कहना ,
इसे आज का फैशन समझना ।
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