जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विधा आलेख
दिनांक 17/09/2020
शीर्षक जीवन और वर्तमान चुनौतियां
जीवन अग्रसर है आगे बड़ रहा है इसी का नाम जीवन है। जीवन में कई चुनौतियां आती हैं और हम उसका सामना करते हैं। परन्तु वर्तमान समय में"कोरोना"नामक महामारी संपूर्ण विश्व के लिए, संपूर्ण मानव जीवन के लिए चुनौती बनकर सामने खड़ी है। जिससे संपूर्ण विश्व पिछले 8-9 महीने से अपने अपने स्तर पर इस महामारी रूपी चुनौती से निपटने का प्रयास कर रहे हैं।
अपने भारत देश की बात करें तो फरवरी में इसकी सुगबुगाहट शुरू हुई और मार्च से लॉक डॉउन का सिलसिला प्रारंभ हुआ। शुरुवात में लोगों ने इसे हल्के में लिया कोरोना और लॉक डॉउन दोनों को। परंतु बाद में लॉक डॉउन का विरोध किया गया, उल्लंघन करने का प्रयास किया गया।
कोरोना के इस समय में प्रवासी मजदूरों को बहुत चुनौती का सामना करना पड़ा मीलों भूखे प्यासे पैदल चलना पड़ा अपनी घरों की अोर क्योंकि जहां वे गए थे वहां उनका रोजगार छीन गया था रोजी रोटी की समस्या थी। कई कल कारखाने बंद हो गए उससे भी बेरोजगारी की चुनौती खड़ी हो गई।
पाठशाला, कॉलेज सभी शैकषणिक संस्थान मार्च 2020 से आज पर्यन्त तक बंद हैं। बच्चों के सामने शिक्षा प्राप्ति आज के समय में चुनौती बन गई हैं। शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों के पढ़ाई के लिए नित नए नए प्रयोग जारी है।
मार्च के लॉक डॉउन और वर्तमान समय के लॉक डॉउन में काफी अंतर है। मार्च से अप्रैल के लॉक डॉउन के दौरान सरकार ने लोगों को कोरोना से बचने के उपाय बता दिए थे और संपूर्ण लॉक डॉउन हमेशा रखा जाए यह भी सरकार के लिए संभव नहीं हैं, इस कारण लॉक डॉउन में धीरे धीरे शिथिलता दी गई। परन्तु इस शिथिलता को लोगों ने गलत तरीके से ले लिया। आज जब घर से बाहर जाओ तो लगता ही नहीं कि किसी प्रकार की महामारी का प्रकोप है। इसी कारण आज हर दूसरे तीसरे व्यक्ति को कोरोना हो रहा हैं।
लोगों में आज एक और चुनौती हैं या कहे भ्रम हैं कि यदि हममें कोरोना संबंधी लक्षण दिख रहे हैं तो क्या करें? टेस्ट करवाएं या ना करवाएं? करवाएंगे तो पॉजिटिव आ गया तो क्या होगा? अस्पताल में ले जाएंगे वहां इलाज होगा कि नहीं होगा? कहीं अस्पताल में लेजाकर हमे मारकर हमारे अंग तो नहीं निकाल लेंगे वगैरा वगैरा...। ऐसा करते करते सोचते सोचते जब कोरोना हमारे शरीर पर हावी होने लगता हैं तब हम अस्पताल भागते हैं ।
मानते हैं डॉक्टर को भगवान का रूप माना गया है पर आखिर हैं भी तो वो इंसान। वो भी अपना पूरा प्रयास करते हैं परन्तु जब हम ही अंत समय में उनके पास गए हैं तो वो भी क्या कर सकते हैं।
सारा विश्व कोरोना रूपी चुनौती को हराने में लगा है। कोरोना वारियर्स कई कई दिनों से अपने परिवार से नहीं मिले। कई कोरोना वारियर्स अपनी ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए।
आज भी सारे विश्व के वैज्ञानिक इस महामारी को हराने के लिए वैक्सीन बनाने में दिन रात जुटे हुए हैं। हम सभी विश्व की आम जनता उन समस्त कोरोना वारियर्स को हृदय से आभार धन्यवाद देना चाहेंगे जो दिन रात कोरॉना महामारी रूपी चुनौती से निपटने में लगे हुए हैं एवम् वैक्सीन बनाने में लगे हुए हैं उन्हें बहुत बहुत शुभकामनाएं ईश्वर आप लोगों को शीघ्र सफलता प्रदान करें,.....
सूर्य प्रकाश पाटिल
Very nice
ReplyDeleteबहुत बढ़िया लेख
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