Wednesday, September 23, 2020

महासमुंद से विनोद कुमार "जोगी" की लघुकथा- अद्वितीय सच

रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुन्द
विषय :- अद्वितीय सच
शीर्षक :- 
विधा :- लघुकथा

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एक खुले विजन में एक नन्ही सी चिड़िया रहती थी। वह बहुत ही सरल स्वभाव की थी, साथ ही बहुत ही दयालु भी थी। वह जंगल के किसी भी प्राणी को मुसीबत में देखती तो उसकी सहायता के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा देती थी। उसके इसी स्वभाव ने नन्हीं सी चिड़िया को सभी के आँखों का तारा बना दिया था।
           एक बार की बात है। जंगल में सूखा पड़ा था, जंगल के सारे पानी के स्त्रोत सूख चुके थे। इन सब के बीच एक नन्हा सांप का बच्चा पानी की तलाश में तड़प रहा था। नन्हीं चिड़िया को उसपर दया आ गई, उसने उसे अपनी चोंच में दबाकर दूर एक नदी में ले गई। सांप खुशी से झूम उठा।
         समय का पहिया घूम गया, एक बार की बात है, जोरों की आँधी से वह पंछी घायल होकर नदी में गिर गई, और डूबने लगी। उसे अब उसकी मृत्यु दिखने लगी थी, तभी एक सांप ने अपनी पीठ पर रख उसे किनारे तक ले आया, साथ ही अन्य जीवों ने मिलकर उसका इलाज करवाया, और वे सभी खुशी - खुशी रहने लगे। उक्त कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि दुनिया का एक अद्वितीय सत्य है कि परोपकार कभी खाली नहीं जाता, अगर हम किसी की मदद करेंगे तो जरूरत पड़ने पर वे भी हमारी मदद करेंगे।

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