Friday, September 11, 2020

रायगढ़ से मनोरमा पटनायक की रचना- अंधविश्वास

रचनाकार :- मनोरमा पटनायक 
पता :- तमनार ,रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
 वर्तमान पता :- सम्बलपुर ओड़िशा
विषय :- अंधविश्वास 
अलंकार :- निदर्शना अलंकार

अन्धविश्वास का काला साया|
जीवन को है भरमाया |
जादू ,टोना ,अशुभ, अमंगल |
पढ़े लिखे को अनपढ़ बनाया |

विज्ञान के युग में हम तकनीक अपनाते हैं |
चाँद पर भी घर का सपना 
सजाते हैं |
पर मंद बुद्धि इतने बिल्ली के 
रास्ता काटने पर घबराते हैं |
अगर होता ऐसा तो बिल्ली को बाउडर पर पहरा लगवाते हैं |

कहतें हैं खर मास में व्याह अमंगल होता है |
विपदा आती है जीवन में दंगल होता है |
यह मनुज की सोंच गलत क्या मनुज के पेट से बन्दर पैदा होता है |
सुविचार और कर्म सब काम मंगल होता है |

साल भर बिस्तर तान के हम सोते हैं |
और परीक्षा के पहले दिन मंदिर में होते हैं |
नए नए प्रस्ताव ले ईश्वर के पास रोते हैं |
कभी सांप को दूध पिलाते हैं कभी गाय के पैर धोते हैं |
इन्ही सबसे मिले सफलता तो फिर शिक्षा और शिक्षक व्यर्थ होते हैं |

स्त्री विधवा हुई तो अभागी कहलाती है |
मुख देखे भी पाप जिसका क्या वो अपने पति की उम्र खाती है |
क्यों इतना दुर्व्यवहार होता फिर 
क्यों अपमान सहती जाती है |
जीवन मरण पर उसका क्या बस 
जो अन्धविश्वास की बलि चढ़ाई जाती है |

ढोंगी साधुओ को हम अपना विधाता बनाते हैं |
माँ बाप को ठोकर मारें , पत्थर को पूजते जाते हैं |
अपनी इच्छा पुरण करने बेजुबानो की  बलि चढ़ाते हैं |
ये ढ़ोंगी इसी की देन जो कुकर्म करते नहीं कतराते हैं |

अन्धविश्वास वो घुन है जो 
समाज को खा जाता है |
सबसे बुद्धिजीवी प्राणी ,
गधे सा पशु बन जाता है |
कर्म करो अच्छे ,निश्चिन्त रहो 
कर्म पाषाण में पुष्प खिलाता है |

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...