*जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)*
*शीर्षक - " अंधविश्वास "*
*विधा - छंदमुक्त कविता*
*अलंकार - निदर्शना अलंकार*
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अंधविश्वास का यह कैसा बोलबाला।
नजर उतारे रंग कैसे काला।।
अंधविश्वास पर विश्वास कैसा,
लोगों ने क्यों उसको सम्हाला।।
जादू-टोना को मानकर,
झाड़-फूँक क्यों कराते हैं।
शिक्षित होकर भी क्यों,
अशिक्षित की भूमिका निभाते हैं।।
रुक जाते कहीं जाते हुए,
जब बिल्ली रास्ता काटती है।
जानवर की इस आवागमन को,
क्यों अशुभ मानी जाती है।।
बूरी नजर से बचाने,
दरवाजे पर नींबू मिर्च बाँधी जाती है।
फिर भी क्यों घर परिवार में,
दुःख क्लेश बसेरा कर जाती है।।
वंशज को आगे बढ़ाने,
क्यों लड़के को ही आधार माना जाता है।
लड़की की चाह में देखो,
लक्ष्मी को ही अशुभ माना जाता है।।
अंधविश्वास बहुत ही घातक,
समाज में पनपा एक पाप है।
दसता जो लोगों के जीवन को,
ऐसा जहरीला साँप है।।
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*निदर्शना अलंकार का प्रयोग* -
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1. अंधविश्वास पर विश्वास कैसा।
2. शिक्षित होकर भी क्यों
अशिक्षित की भूमिका निभाते हैं।
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सही है लोगो को जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है
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