रायगढ़, छत्तीसगढ़
विधा-मुक्त छंद काव्य
विषय-अंधविश्वास( निदर्शना अलंकार)
शीर्षक- विधवा
एक स्त्री है अपने आपमें
परिपूर्ण, सम्पूर्ण
पर साथी के चले जाने पर
क्यूँ छीन लिए जाते हैं सारे अधिकार
वैधव्य का दंश सहने को विवश कर
क्यूँ छीन लिए जाते हैं सारे अलंकार
एक स्त्री है अपने आपमें
सक्षम, सबला
पर उसे अबला मान कर
क्यूँ ताउम्र उसे आँसू बहाने को
मजबूर किया जाता है
वह एक माँ है जो निभाती है
जिम्मेदारी पिता से बढ़कर
संसार सागर से एक छोटी नाव
के सहारे पार कराती अपने बच्चों को
हर मुश्किलों से लड़ना सिखाती है
एक स्त्री है अपने आपमें
भक्ति और शक्ति का स्वरूप
पर यह संसार उसे विधवा मान
क्यूँ छीन लेती है उसके वस्त्र-अलंकार
उसके निश्छल हंसी से झरनों का स्वर छीन
उसे समाज और परिवार से अलग कर
क्यूँ बना देती हैं अमावस की रात सा उसका जीवन
अंधविश्वास की इस बलि -वेदी पर न जाने
और कितनो से जीने का हक छीना जाएगा?
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