रचनाकार-एच-एस-अरमो, अरमान ।
जिला-रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
विषय-""समाज सेवा "" ।
शीर्षक-""नशामुक्ति अभियान "" ।
विधा--"निबंध लेखन " ।
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=::=|||<""नशामुक्ति अभियान ""|||==
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संसारिक जीवन में मानव को सुख और दुःख दोनों का ही सामना करना पड़ता है ।सुखी होने की बलवती इच्छा के कारण,वह अपनी मानसिक वेदना या दुख के निवारण का हर संभव प्रयास करता है ।इस प्रकार दुःखों से पलायन करने के लिए मानव के सामने जितने विकल्प होते हैं,उनमें सबसे विनाशकारी है मादक या नशीले पदार्थों का सेवन ।
समाज़ में सभी प्रकार के लोग रहते हैं ,कुछ अमीर व कुछ गरीब हैं ।
अमीर व्यक्ति विलासिता के लिए नशाखोरी करता है तो एक ओर गरीब आर्थिक स्थिति से तंग आकर या गम भुलाने की आड़ में सेवन करता है ।ऐसे में नशीली दवाओं के सेवन या नशीले पदार्थों का सेवन से मनुष्य की मानसिक गति धीमी पड़ जाती है और वह अपनी सामान्य स्थिति को कुछ समय के लिए भूल जाता है ।इस प्रकार कुछ समय के लिए ही सही,पर उसे जो राहत मिलती है उससे प्रेरित होकर वह उनका बारंबार प्रयोग करने लगता है ।तब स्थिति ऐसी हो जातीहै कि नशा न करना उसके बस की बात नहीं रह जाती ।वह उनका प्रयोग किये बिना नहीं रह पाता ।
व्यक्तिगत दुःख को भुलाने के अतिरिक्त नशीले पदार्थों के सेवन के और भी कई कारण हैं ।उनके प्रयोग से प्राप्त क्षणिक सुख के विषय में अपने मित्रों या परिचितॉ से सुनकर भी कई युवक तथा युवतियां उनका सेवन करते हैं,इस प्रकार केवल जिज्ञासा या कुतूहल वश किया गया प्रयोग ही उनकी आदत में बदल जाता है ।
ऐसी ही घटना का हाल ही में उजागर हुआ है कि मुम्बई शहर के कुछ प्रतिष्ठित नागरिक मादक पदार्थों के सेवन करने व कारोबारियों से जुड़े रहने की,देश की जाँच एजेंसी 'एन सी बी ' ने खुलासा किया है ।कई व्यक्ति ऐसे भी होते हैं जो मादक पदार्थों के सेवन के कुप्रभावों से पूरी तरह से अवगत होने पर भी दूसरों के बहकावे में आकर उनका प्रयोग करने लगते हैं,इनके संकल्प दृढ़ न होने के कारण वे उनका सेवन करने से इंकार नहीं कर पाते हैं और अन्ततः उन्हें लत पड़ जाती है ।इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों आदि में छात्रों को बलपूर्वक भी नशीली दवाओं को दी जाती है ।ऐसे में व्यक्ति आरंभ में विरोध करने पर भी अन्ततः वश में हो जाता है ।
आज मादक पदार्थों और नशीली दवाईयों का प्रयोग एक महामारी बन चुका है ।ये पदार्थ कई प्रकार के होते हैं ।कुछ खाने वाले पदार्थ हैं जैसे-अफीम,भाँग आदि ।कुछ पीने वाले पदार्थ हैं जैसे-शराब,ताड़ी आदि ।कुछ धुंए के रूप में ग्रहण किये जाते हैं ।जैसे-चरस,गाँजा आदि ।कुछ रासायनिक पदार्थ होते हैं जैसे-नींद की गोलियां और मार्फिया के इन्जेक्शन आदि ।कुछ पदार्थ दन्तमंजन के रूप में प्रयोग किया जाता है जैसे-गुड़ाखु ,तपकीर (नस) आदि।नशे की लत पड़ जाने पर ये सभी पदार्थ प्रयोक्ता का सर्वनाश कर देते हैं ।धीरे-धीरे ये व्यक्ति एक दर्दनाक मौत की तरफ बढ़ते हैं ।कुछ लोगों को नशे की पूर्ति न होने पर,इसे पाने के लिए कभी-कभी गम्भीर अपराध भी कर बैठते हैं या कभी आत्महत्या भी कर लेते हैं ।
नशीले पदार्थों के उत्पादन तथा तस्करी के मुख्य केन्द्र पकिस्तान,अफगानिस्तान और इराक आदि राष्ट्र हैं ।इनसे नशीले पदार्थों की तस्करी के फलस्वरुप वे भारत में भारत-पाक सीमा तथा भारत-नेपाल सीमा से प्रवेश करते हैं ।नशीले पदार्थों का व्यवसाय करने वाले उनके क्रय-विक्रय से करोड़पति बन जाते हैं और दौलत के बल पर अपना करोबार जारी रखते हैं ।कभी-कभी इसके दुष्परिणाम भी सामने आतें हैं जैसे-आंतकवादियों को बढ़ावा,गुण्डागर्दी ,माफियागिरी आदि।
इस सामाजिक बुराईयों से सारा विश्व परेशान हो रहा है ।नशीले पदार्थों के सेवन से भारत में ही हजारों घर उजड़े हैं ।इस अभिशाप का सबसे बड़ा शिकार गाँव/शहर का युवा वर्ग हुआ है ।आजकल बच्चों में भी इसकी लत लग गयी है ।अवैध रूप से होटल,रेस्तरां,पब,बार और हुंका बार आदि चल रहे हैं ।
समाज़ और देश में व्याप्त इस नशे की प्रवृति को रोकना अतिआवश्यक है ताकि इसके लत से प्रभावित बच्चे,युवा वर्गो को अँधियारे में जाने से रोकना होगा ।इसके लिए सामाजिक संगठन,नीजि सेवा संस्थायें,शासकीय संस्थाएँ राष्ट्रिय स्तर व विश्व स्तर पर रोकथाम के लिए गंभीरतापूर्वक कार्य करने की जरूरत है ।
समाज़ के द्वारा जन जागरण का कार्य करने की जरूरत है साथ ही प्रिन्ट् मिडिया,इलेक्ट्रानिक मीडिया व नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से भी इस कार्य को पूरा करने के प्रयास करना चाहिए ।शिक्षा के क्षेत्र में भी नशे के दुष्प्रभाव के बारे मेँ पठन-पाठन सामग्री के रूप में सम्मिलित करने की जरूरत है ।
मादक पदार्थों की समस्या का समाधान खोजने की दिशा में सरकार ने कई प्रभावी कदम उठायें हैं ।संसद में ऐसे अधिनियम पारित किये गये हैं जिनके अनुसार मादक पदार्थों की तस्करी व उनके गैरकानूनी क्रय-विक्रय करने वालों के लिए कठोर दण्ड निर्धारित किये गये हैं ।
अंत में यही अपील है कि सभी नागरिकों को मादक पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए और यदि कोई इसका सेवन करता है तो उसे रोकने के लिए विनम्र निवेदन करना चाहिए ताकि इस बुराई पर रोक लगे ।जागरूक नागरिक की हैसियत से ऐसी घटना की जानकारी गोपनीय तरीके से संबंधित विभाग को देनी चाहिए ।हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि इसकी रोकथाम के लिए समाज व सरकार को सहयोग करने की जरूरत है ।साथ घर पर कभी भी भूल से भी मादक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए ताकि इसका प्रभाव परिवार के अन्य सदस्यों को न पड़े ।हमें भी अपने आप से इस बुराई से दूर रहने का संकल्प लेना होगा ।
=======इति =============
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