Friday, September 25, 2020

सावित्री यादव "सावि " की रचना- भोर का सूरज


विषय _भावी सुबह 
रचनाकार -सावित्री यादव "सावि "
             बिलासपुर छ. ग. 
             
             
शीर्षक _भोर का सूरज 

भोर का सूरज अपने साथ नई रौशनी  लाता  है |
खुद जागकर  कर हमें जगाने आता है |

उम्मीदों कोसाथ लिए  फिर चल ये सिखलाता है |
कर्तव्य पथ पर बढ़ो  तो वो हमें समझाता है |

दिन निकला अब करम करो अपना  अपना धर्म करो |
अच्छी बातो को अमल मे लाओ  अपना जीवन धन्य  करो |

सूरज निकलते जीवन भी चल पड़ता है |
शाम ढले जीवन भी थम जाता है |

आकर सुबह सबेरे फूलो को खिलाता है |
उसकी  रौशनी मे फिर पत्तों पर ओस नहाता है |

चिड़िया  भी स्वागत मे रवि के गीत गाती है |
पूरी प्रकृति  भी फिर झूम उठती है |

जिसको नमन धरती कर फूलो की क्यारी सजाती  है |
मोर खुश हो जाता है कोयल कु कु करती है |


गृहणियां  भी द्वार पर रांगोळी  बनाती है |
सूरज की  पहली रौशनी उस पर भी पड़ जाती है |

झरने कल कल  करते  है नदिया   भी गुनगुनाती है |
फिर जीवन चल पड़ती  है और मुस्कुराती है |

सूरज आते  ही चल पड़ता  है करवा जीवन का, 
यही सत्य है इस  के जीवन चक्र  का |

भोर का सूरज रोज आकर खुशियाँ  दे जाता है |
नवजीवन के संचार कर  जीना हमें सीखता है |


भोर का सूरज अपने साथ नई  रौशनी  लाता है |
खुद जागकर हमें जगाने आता है |

रचनाकार  _सावित्री  यादव  "सावि "
              बिलासपुर  छ. ग. 
    

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