Saturday, September 12, 2020

मुंगेली से नागेश कश्यप की रचना- पितर पाख

रचनाकार:- नागेश कश्यप
जिला:- मुंगेली(छत्तीसगढ़) 
शीर्षक:- पितर पाख (पितृ पक्ष)
विधा:- कविता

       पितर पाख (पितृ पक्ष)

    कइसन पितर पाख ग संगी,
    जम्मो झन मनावत हे।
    जियत मनखे ल छोड़ के,
    कँऊवा कुकुर ल खवावत हे।।

    तरोई पान अऊ काँशी के कुश,
    गँहू जवाँ संग जोहारत हे।
    जियत भर पानी नई देइच,
    मरे ऊप्पर ले गोहारत हे।। 

    भरम तुमन ल अतका हवै,
    मरे ऊपर ले पानी पाथे।
    आड़ इँखर लेके ग संगी,
    चीला बरा मन भर के खाथे।।

    मरे ऊपर ले तोर हाथ ले बेटा,
    पानी कहाँ ले पाहूँ मैं।
    जियत म तैं छाती जुड़वा दे,
    मन भर के मर जाहूँ मैं

    जऊन करना हे जियत म करले,
    मरे ऊपर ले तैं का करबे।
    उम्मर भर के करम ल भइया,
    पितर पाख म का धो डरबे।।

    रुढ़ीवादी अऊ परंपरा ले हटके,
    विचार मन म अपन करौ।
    अगोरा छोड़ पितर पाख के संगी,
    दाई ददा के जतन करौ।।

                       नागेश कश्यप।

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