जिला-कांकेर,छग
विषय-पितृपक्ष
शीर्षक-पितरों की याद में।
अलंकार-निदर्शना अलंकार
बहुत पूजा अर्चना कर ली,
पितरों की याद में।
बहुत सुंदर रसोई बनवाई
पितरों की श्राद्ध में ।
आडंबरों के पर्दे हटा देते
पितरों की याद में।
जीवित में ही रसोई बनवाते
पितरों के सम्मान में।
सीख मानव जीवन के गुर,
मरकर कोई खाता नहीं।
गुजर गया जो इस दुनिया से
लौट कर आता नहीं।
जीते जी जो सेवा करता जग में
पुण्य प्राप्त कर जाता है।
आशीष ले उन बुजुर्गों का वह,
जीते जी तर जाता है।।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर, छग
----------------------------------------
निदर्शना अलंकार-
1-आडंबरों के पर्दे हटा देते।
2-मरकर कोई खाता नहीं।
3-आशीष ले बुजुर्गों का,
जीते जी तर जाता है।
------------------------------------
No comments:
Post a Comment