रायगढ़, छत्तीसगढ़
विधा- मुक्त छंद कविता
विषय-भ्रमर (उदाहरण अलंकार)
शीर्षक-भ्रमर से मिलन
जैसे मधुकर के आस में खिला है उपवन
वैसे मेघ की प्रतिक्षा में झूम रहा है वन
विरह की इस बेला में उदास हैं फूलों का यौवन
भ्रमर के आने की आहट से ज्यों प्रफुल्लित है मन
मंडराते भौरों की ओर झुक करते आलिंगन
जैसे प्रियतम से हो रहा हो मधुर मिलन
फूलों के रसास्वादन से भौरों को मिलता नया जीवन
ज्यों पतझड़ पे बहार का आया हो मौसम
भ्रमर के भ्रम में ही गुजर जाता मानव का जीवन
वैसे ही जैसे प्रेम की तलाश में बीत जाता यौवन।
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