संबलपुर, जिला-कांकेर,(छ. ग.)
विषय-पितृ पक्ष
(निदर्शना अलंकार का प्रयोग)
बड़ा पावन आशीषों से भरा श्राद्ध पक्ष आया,
पूर्वजों की कृपादृष्टि पाने का सुनहरा पल आया।
जीते जी माँ-बाप खाने पीने दो मीठे बोल को तरसे,
वाह रे छद्मवेशी मरने के बाद कौओं कुत्ता को परसे।
जीते जी बुजुर्गो को तरसाया वृद्धाश्रम को पहुँचाया,
मरने जे बाद दुआ पाने ब्राह्मण खिलाया।
सारी कायनात रो उठी थी बुजुर्गों की दशा देख,
अब विभिन्न व्यंजन खिला जीवन में खुशियाँ तलाशती।
जन्म देने वाला और सँवारने वाला अभावों में पले,
उनको संभालने का समय आया तो मुँह फिराया।
*निदर्शना अलंकार का प्रयोग*-
1.मरने के बाद दुआ पाने ब्राह्मण खिलाया।
2.जन्म देने वाला और सँवारने वाला अभावों में पले,।
3.उनको संभालने का समय आया तो मुँह फिराया।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर,(छ .ग.)
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