स्थान--नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला -जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा-कविता (छंदमुक्त)
शीर्षक-वतन की राह में
कदम हमारा, वतन की राह में ।
हम बढ़े जा रहे,इसकी चाह में ।
मंजिल तक जाना है, लक्ष्य रखे हैं ।
वादे इरादे अपने,पूरे पक्के हैं ।
नहीं थकान कुछ पांव ,न बोझ बांह में ।
पर्वत है सामने,उस पर चढ़ जायेंगे ।
सागर है गहरी,उसको तैर जायेंगे ।
कहीं भूलेंगे नहीं,हम वाह वाह में ।
दिन ढ़ल रहा,उसे ढ़ल जाने दो ।
रातें सम्हल रही,सम्हल जाने दो ।
कमी आयेगी नहीं, अपने उत्साह में ।
एक अच्छे जीवन की, तलाश है अपना ।
विश्व शांति के लिए,प्रयास है अपना ।
क्यों जियेगें लोग, कोई भी आह में ।
जब सक्षम हैं हम,सब कुछ कर सकते हैं ।
चाहें तो जी सकते, और मर सकते हैं ।
विश्वास हमें ईश्वर पर, और अल्लाह में ।
व्याख्या----कवि ने वतन की राह कविता में विश्व शांति और
अच्छे जीवन की तलाश और विश्व शांति के लिए
प्रयास एवं ईश्वर पर कार्य सिद्ध होंगे विश्वास
व्यक्त किया गया है ।
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