विषय _भ्रमर
रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
विषय _भौरें की सीख
गुंजन करते भौवरे मन को भा जाते है |
फूलों की खुशबु चुराने फूलों पर आ जाते है |
इनसे सीखो गीत ख़ुशी के गाते जीवन जीते है |.
क़ोई भी मौसम आये ये अपना काम कर जाते है |
नित दिन उनका यही ठिकाना आते जाते है |
रोज अपना काम करते फिर कंही उड़ जाते है |
ये सीखा जाते है| गुन गुन कर मधुर गीत सुनाते है |
फूलों में बैठ कर रस ले लेते प्रेम का अर्थ समझाते है |
ये गुंजन कर संगीत की धुन सीखाते है |
कर्तव्य पथ पर डटे रहो यह कह जाते है |
रचनाकार _सावित्री यादव "सावि"
बिलासपुर छ. ग.
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