Monday, September 7, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- भ्रमर

रचयिता-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-भ्रमर
विधा-कविता (मुक्त छंद)
अलंकार-उद्धरण अलंकार

मन भ्रमर भटकता क्यों तू,
दुनिया दो दिन का  है मेला।।

कभी आसमां में है  बादल ,
कभी धूप का छाये है रेला।।

कभी मिले फूलों की बगिया,
कभी कांटों का  मिले सेहरा।।

मन भ्रमर क्यों बाग  में घूमे,
फूल की चाह में  नैन तरसे।।

अंसुवन जल से मन न माने,
पानी को वो पल भर तरसे।।

जीवन पल भर का  है मेला,
है सुख और दुःख का रेला।।

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
_________________________
उद्धरण अलंकार-
1-मन भ्रमर।
2-कांटों का सेहरा।
3-सुख दुःख का रेला।
------------------------------------------

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...