जिला-कांकेर ,छग
शीर्षक-जीवन और वर्तमान चुनौतियां
विधा-आलेख
जिंदगी अपनी रफ्तार से बढ़ती है|समय के चरण गति के साथ बढ़ते हुए अपनी छाप छोड़ जाते है|पर जीवन में ऐसी भी चुनौतियां आती हैं,जो मानव जीवन को अस्त -व्यस्त कर देती है|करोना महामारी ऐसी ही चुनौतियां पैदा कर दिया है कि समूचा मानव जीवन कई समस्याओं से जूझ रहा है|आज अर्थ व्यवस्था चरमरा गई है|भुखमरी,बेकारी,बीमारी ने लोगों को मानसिक संतुलन खोने को मजबूर कर दिया है|लोग डर के कारण बेरोज़गार हो गये हैं|मंहगाई मुँह बाये खडी है
घरेलु हिंसा,मानसिक तनाव के आंकडे बढे़ हैं|
स्कूली बच्चे सबसे ज्यादा हताहत हुए हैं|वे न स्कूल जा पा रहे हैं न दोस्तों के साथ खेल पा रहे हैं|आनलाइन पढ़ाई से सिर दर्द व मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं|
करोना की न तो सटीक दवा न ही वैक्सीन बन पाई है|
आज हर वर्ग का व्यक्ति उहापोह की जिंदगी जी रहा है|योगा, व्यायाम धरे के धरे रह गये हैं|
आवश्यकता है आज चुनौतियों को स्वीकार कर परिस्थिति के अनुसार ढलें|मजबूर नहीं मजबूत बनें|आशावादी सोंच रखें|विपरीत परिस्थितयों मे जीना सीखें|करोना को हराने की ताकत रखें|
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर ,छग
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