Friday, September 11, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- अंधविश्वास

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- कविता (निदर्शना अलंकार का प्रयोग) 
शीर्षक -"विश्वास और अन्धविश्वास"
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अंधविश्वास की छाया बड़ी गहरी 
विश्वास   की  लपटें  पड़ी  ठहरी 

जब  भी  कोई  समझाने   आए 
उसके  मुंह  में तमाचा पड़ जाए 

कितने  आए और गए  हो   गए 
पर  इसकी   पैठ  न  जाने  पाए 

सदियों   से   विश्वास   मुँह  ताके 
और अंधविश्वास बाजी मार जाए 

देख  कर  भी  अनजान  बनते हैं 
अंधविश्वासी मान-सम्मान पाते हैं 

विश्वास   जो  आगे  बढ़ना  चाहे 
टांग खींचने से बाज नहीं आते हैं

अरे  नादान शब्दों  से  ही समझ 
विश्वास   में  सत्य  का   वास  है

विश्वास   जब   अंधा  हो   जाए
तो अंधविश्वास पैदा हो  जाता  है  ।

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