Saturday, September 19, 2020

मनोरमा पटनायक की रचना- सकड़ें

रचनाकार :- मनोरमा पटनायक 
पता :- तमनार ,रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
 वर्तमान पता :- सम्बलपुर ओड़िशा
विषय :- सड़कें 
विधा :- कविता (मुक्त छंद )

राहगीर हैं हम जिंदगी सड़क है |
चलते जाना सांस जब तलक है |
हर मोड़ नया दुःख सुख से बना है |
रुक जाएँ दो पल पर रहना मना है |
कोमल कभी है कभी रास्ते कड़क है |
राहगीर हैं हम जिंदगी सड़क है |

हर पल चलना है मिलना बिछड़ना  है |
रिश्तों के गड्ढों को प्यार से भरना है |
ठोकर भी खानी है खुद ही सम्भलना है |
आशाओं के रंगो से पथ को रंगना है |
खोने का डर भी पाने की ललक है |
 राहगीर  हैं  हम  जिंदगी  सड़क  है  |

हँसते हँसाते चलो ,प्यार लुटाते चलो |
कल की किसे खबर आज बिताते चलो |
काँटों को निकाल ,पुष्प लगाते चलो |
पाप पुण्य दोराहों पर पुण्य चुन बढ़ाते चलो |
कर्म ही तय करेंगे मिलेगा मोक्ष ,स्वर्ग या नरक है |
राहगीर हैं हम जिंदगी सड़क है |

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