जिला - बलौदाबाजार (छ .ग.)
विधा - छंद मुक्त कविता
विषय- सड़क
शीर्षक - जीवन एक सड़क है
मानव - जीवन एक सड़क है ,
हमें निरन्तर चलना है ।
लक्ष्य प्राप्ति तक बिना थके ही ,
आगे - आगे बढ़ना है ।।
जर्जर हो या पक्की सड़क ,
चाहे कैसा मोड़ मिले ।
पीछे मुड़कर नहीं देखना ,
बिना रुके ही दौड़ चलें ।।
वस्तु व्यक्ति परिस्थिति ,
जीवन - पथ पर मिलते हैं ।
जैसे बाइक कार सड़क पर ,
यूँ ही सदा गुजरते हैं ।।
झाड़ी - जंगल मे भी हमको ,
अपना सड़क बनाना है ।
मेहनत और संघर्ष से ,
जीवन को चमकाना है ।।
चुनौतियों से लड़ते - लड़ते ,
आत्मविश्वास जगाना है ।
दुःख - चिन्ता में मुस्कुराते ,
आगे बढ़ते जाना है ।।
चकाचौंध की दुनिया के ,
आकर्षण से बचना है ।
अर्जुन जैसी दृष्टि आँख पर ,
धुन के पक्के रहना है ।।
हानि - लाभ और यश - अपयश ,
सबकी थपेड़े खाते ।
भाई - बन्धु शत्रु - मित्र से भी ,
चलना है हाथ मिलाते ।।
जीवन का यह सड़क सुहावन ,
या फिर लगे भयानक ।
रोते - हँसते कैसे भी करके ,
चलना पड़ेगा दूर तक ।।
ज्ञान भक्ति वैराग्य की ,
लेते रहना है खुराक ।
धर्म - संस्कृति को अपनाते ,
जीवन - पथ पर हो अनुराग ।।
संतों के सान्निध्य में ,
जीवन - पथ को समझना है ।
दीक्षा - शिक्षा लेकर उनसे ,
यात्रा पूरी करना है ।।
जीवन की जब शाम हो जाये ,
आ जाये अंतिम पड़ाव ।
हमें पहुँचना होगा निश्चित ,
आत्म राज्य के गाँव ।।
जीवन - पथ का उद्देश्य है ,
भवसागर से तरना ।
मानव-जीवन की चरम सफलता ,
अपने आपसे मिलना ।।
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