जिला:- मुंगेली(छत्तीसगढ़)
शीर्षक:- कइसन दिन
विधा:- जयकारी छंद
कइसन दिन
कइसन दिन हा आगे राम, सिधवा हे फोकट बदनाम।
लबरा घर काजू बादाम, उँखरे गुठलू उँखरे आम।।
आन कमावय आन ह खाय, पर के बाँटा लूट अघाय।
सतकरमी मनखे कहिलाय, लबरा कपटी पापी आय।।
जाँगर चोर ल घर उजियार, कमिया मन बर हे अँधियार।
लबरा झबरा घर भरमार, कइसन अब होगे संसार।।
सिधवा मन के मरे बिहान, रात घलो उँखरे दिनमान।
घर मा बन बइठे जजमान, आनी बानी के फरमान।।
बह रे मनखे जीव ल तोर, अइसन पूंजी झन तो जोर।
हाय हाय तँय करथस मोर, परही तोला जाना छोर।।
सिधवा बर दुकला पर जाय, लबरा छप्पन भोग लगाय।
रेंगय माथा मुड़ी उठाय, काबर कोनो ला डर्राय।।
मरना होगय बड़ हलकान, कइसन दिन अब हे भगवान।
कोदो ना कनकी ना धान, इँखरे बर मेवा पकवान।।
नागेश कश्यप।।
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