रचनाकार -- चेतन सिंह क्षत्रिय
पता -------- कसडोल , छत्तीसगढ़
विषय ----- नदी
शीर्षक ---- नदियाँ ( बालगीत )
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कल-कल , कल-कल करती नदियाँ !
हर - क्षण , हर - पल बहती नदियाँ !
जीवों की प्यास बुझाती है !
खेतों को सींचती जाती है !
पथिकों को यह राह दिखाए ,
धरा की तपन मिटाती है !
हर पल यह बढ़ती जाती ,
स्थिर न कभी रहती नदियाँ!
कल- कल , कल -कल करती नदियाँ !
रास्ता हो चाहे कांटों भरे !
चट्टान हो चाहे राह में खड़े !
इनसे न यह घबराती है ,
रूकावट हो चाहे जितने बड़े !
रूकती है न इनसे डरकर ,
हर दर्द को सहती नदियाँ !
कल -कल , कल -कल करती नदियाँ !
तुम्हें अगर मंजिल है पाना !
हर दम तुम बढ़ते जाना !
तुम्हारी राह न कोई रोक सकेंगे ,
औरों को भी राह दिखाना !
न घबराना मुश्किलों में कभी ,
सबसे यही कहती नदियाँ !
कल- कल ,कल-कल करती नदियाँ!
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