Monday, September 21, 2020

चेतन सिंह क्षत्रिय जी की रचना- नदियाँ

रचनाकार -- चेतन सिंह क्षत्रिय
पता -------- कसडोल , छत्तीसगढ़
विषय ----- नदी
शीर्षक ---- नदियाँ ( बालगीत )
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कल-कल , कल-कल करती नदियाँ !
हर - क्षण , हर - पल  बहती नदियाँ !
जीवों  की  प्यास  बुझाती है !
खेतों   को  सींचती  जाती है !
पथिकों को यह राह दिखाए ,
धरा   की  तपन   मिटाती  है !
हर  पल  यह  बढ़ती  जाती , 
स्थिर     न     कभी    रहती    नदियाँ!
कल- कल , कल -कल करती  नदियाँ !
रास्ता   हो  चाहे   कांटों  भरे !
चट्टान हो  चाहे   राह में खड़े !
इनसे    न  यह  घबराती  है ,
रूकावट हो चाहे जितने बड़े !
रूकती  है  न  इनसे  डरकर ,
हर      दर्द     को    सहती      नदियाँ !
कल -कल , कल -कल  करती नदियाँ !
तुम्हें  अगर  मंजिल  है पाना !
हर   दम  तुम  बढ़ते   जाना !
तुम्हारी राह न कोई रोक सकेंगे ,
औरों  को  भी राह  दिखाना !
न घबराना मुश्किलों में कभी ,
सबसे     यही     कहती       नदियाँ !
कल- कल ,कल-कल करती नदियाँ!

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