Saturday, September 26, 2020

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- रोजगार

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग.)
विषय - रोजगार
विधा - छंद मुक्त कविता 
अलंकार - विरोधाभास अलंकार
शीर्षक - स्वरोजगार
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       //  स्वरोजगार  //

पहले एक कमाता था ,
               खाते थे सब लोग ।
थोड़े में संतुष्ट सभी ,
             सीमित खर्च उपभोग ।।
लेकिन समय बदल गया ,
               सबको चाहिए काम ।
बेरोजगार की जिंदगी ,
                दुःखदाई  बदनाम ।।
जैसे - जैसे जनसंख्या ,
                   बढ़ती गई अपार ।
वैसे - वैसे समाज मे ,
              कम हो गए रोजगार ।।
शिक्षा और सुविधा के साथ ,
                 बढ़ा नहीं व्यवसाय ।
बेरोजगारी से पीड़ित ,
                 युवा वर्ग समुदाय ।।
बड़ी-बड़ी फैक्ट्रीयाँ मशीनें ,
             उत्पादन तो करती हैं ।
नौकरी धंधा स्वरोजगार ,
           सबके पंख कुतरती है ।।
मैकाले की शिक्षा पद्धति ,
            अंग्रेजी मानसिकता ।
भारत को इण्डिया बनाकर ,
            दे दी गुलामी भिक्षा ।।
मजबूरी मे जिंदगी ,
            घर - परिवार बेहाल ।
रोजी - रोटी के बिना ,
          जनता कैसे खुशहाल ??
ज्यों - ज्यों भारत के नागरिक ,
                      स्वदेशी से दूर ।
त्यों - त्यों घटता गया रोजगार ,
                हुए सभी मजबूर ।।
बड़ी - बड़ी डिग्री वाले ही ,
                  पाते हैं  रोजगार ।
छोड़ दो ऐसी धारणा ,
               करो कर्म से प्यार ।।
शिक्षित और अशिक्षित सारे ,
             महिला पुरुष युवान ।
पैदा करो स्वयं रोजगार ,
        सभी कर्म है एक समान ।।
डॉक्टर वकील इंजीनियर ,
             शिक्षक और पटवारी ।
भागो मत इनके पीछे ,
             कम्पीटिशन है भारी ।।
रोजगार की परिभाषा को ,
                 हमे बदलना होगा ।
अपनी कला - कौशल के सहारे ,
                जीवन गढ़ना होगा ।।
सब्जी ठेला गुपचुप - चाट ,
                  चाय - पान दुकान ।
शौक से करके देखो प्यारे ,
                जागेगा स्वाभिमान।।
खेती - बाड़ी खेल - कूद ,
               या कोई घरेलू कार्य ।
स्वदेशी से उन्नत होगा ,
              यही शर्त अनिवार्य ।।
खाली निकम्मे मत बैठो ,
            कमाते रहो कुछ पैसे ।
बचत करो जिंदगी सँवारो ,
       क्यों जीते हो जैसे - तैसे ??
अपनी भाषा संस्कृति ,
                 स्वदेशी अपनाओ ।
आत्म निर्भर भारत होगा ,
              स्वरोजगार बढ़ाओ ।।

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