Thursday, September 24, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- प्रतिध्वनि

रचयिता-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-प्रतिध्वनि
विधा-कविता (मुक्त छंद)
अलंकार-अर्थान्तरन्यास अलंकार

फूलों में गुलाब,सागर में मोती
मरुभूमि में कमल की तरह ही
होते हैं मानव के किए गए कर्म
सदैव सभी दिशाओं में फैलते हैं|

नेक कार्य सर्वत्र सम्मान दिलाते हैं
अच्छी सोंच,अच्छे कर्म  लौट कर
मानव के पास ही वापस आते हैं,
हम जो बोते हैं  वही तो पाते हैं||

अच्छे कर्मों के बीज कई गुना बढ़
मानव का यश चहुंओर फैलाते है|
कोई बुराई भी करे तो लोग यूं ही
एकाएक विश्वास नही कर पाते हैं|

अच्छा बोलें, अच्छे कर्म पथ चलें,
प्रतिध्वनि तो वापस आयेगा ही,
कर्मों का लेखा- जोखा एक दिन,
स्वर्णिम इतिहास  दुहरायेगा ही||

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
_________________________
अर्थान्तरन्यास अलंकार-
1-नेक कार्य सर्वत्र सम्मान दिलाते हैं|
2-मानव का यश चहुँ ओर फैलाते हैं|
3-स्वर्णिम इतिहास दुहरायेगा ही|
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