ग्राम - बुलाकी
जिला - रायगढ़ छत्तीसगढ़
विधा - कविता
विषय - प्रतिध्वनि
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*प्रेरणा-*
ऐसी संस्कार दीजिए,
जा में संतुष्टि का वास।
संतुष्टि से सुख मिले,
जीवन सफल हुई जाए।
असंतुष्ट अभाव में जो जीए,
पावे जीवन भर दुख।
संसार में असंतुष्टि नहीं,
मन क्यों अभाव का भोग।
जितना धरा पर बीज डालिए,
पाइए उससे अधिक उपज।
फिर भी मन अभाव में क्यों,
ना संतुष्टि मिले ना सफल।
आवश्यकता निश्चित कर,
इतना धन कमाइए।
सभी की परवरिश हो जाए,
ऐसा समृद्धि पाइए।
स्वास से शरीर जीए,
जीए विश्वास से जीवन।
अस्तित्व में मानव जीए,
छूठे भ्रम से मन।
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उर्मिला सिदार
रायगढ़ छत्तीसगढ़
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