Saturday, September 19, 2020

संतराम कुम्हार की रचना- सड़क

*रचनाकार -  संतराम कुम्हार* 
   *जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.)* 
   *शीर्षक  -  " मैं सड़क हूँ "* 
     *विधा - छंदमुक्त कविता* 
 
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मैं सड़क हूँ। 
स्थिर रहती, खामोश रहती, 
राहगीर को मंजिल तक पहुँचाती हूँ। 
थकती नहीं कभी भी मैं, 
गाँव को शहर से मिलाती हूँ।। 

तेज रफ्तार से गाड़ी दौड़ती, 
हर बोझ को मैं सहती हूँ। 
लथपथ खून से कभी मैं हो जाती, 
सड़क नियम पालन करो, 
रो-रोकर ये मैं कहती हूँ।। 

बिना सुरक्षा मुझ पर न चलना, 
हेलमेट सिर पर लगाये रखना।
लाल हरे सिग्नल का पालन करना,
सीट बेल्ट हमेशा बांधे रखना।। 

भ्रष्टाचार के इस युग में, 
मेरा हाल भी लाजवाब है। 
कहीं गड्ढे तो कहीं कीचड़, 
कहीं सड़क में ही बना तालाब है।। 

दुर्घटना का दोषी कौन, 
जो जर्जर सड़क पर होती है। 
कोई खोता बेटा अपना, 
कहीं सुहागिन विधवा होती है।। 

जिंदगी की इस सड़क में भी, 
कई कठिन मोड़ आयेंगे। 
सही दिशा में आगे बढ़ना, 
लक्ष्य तभी हकीकत हो पायेंगे।। 

सदा चलना अपनी दिशा में, 
गलत राह में मत चल देना। 
चंचल मन पर काबू रखना, 
दूसरे का अहित मत कर देना।। 

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 *मौलिक रचना* *(स्वरचित )* 
 *संतराम कुम्हार*
 *बलौदाबाजार (छ. ग.)*

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