विषय _वनांचल में शिक्षा का महत्व
रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
बिलासपुर छ. ग.
शीर्षक _ प्रकृति का महत्व और शिक्षा
जंगल की हरियाली देख मन ऐसे खुश होता है | जैसे
क़ोई सल्तनत मिल गईं हो जहाँ सिर्फ मेरे मन का हो रहा हो |
लगे मन ऐसा झूमने जैसे क़ोई सपना पूरा हुआ हो |
मोर पपीहा कोयल सब जैसे अपने साथी बने हो
कल कल करती नदी मानो क़ोई गीत गा रही हो |
और पूरा वातावरण उसके गीत को चुपचाप सुन रही हो |
जंगली फूलों से लदी जंगल के पेड़ पौधे मन को मोह ले रहे |
लग रहा जैसे किसी ने प्यारी सी रंगोली बना दी हो |
टेड़े मेढे रास्ते और पहाड़ो की सुंदरता देख|
ऐसा लग रहा हो जैसे कुदरत ने बड़े जतन से इसे बनाया है| |
शाम को घर को ओर लौटते लोग उनके हाथो में जंगली जड़ी , बूटी, फल लिये होते है | |
और खुश ऐसे होते है | वो जैसे क़ोई खजाना ला रहे हो |
बच्चों को इस प्रकृति के महत्व समझा उन्हें ,
उन्हें प्रकृति की सुंदरता से अवगत करवाए ऐसा क़ोई पाठ पढाये |
आओ मिलकर प्रकृति की सुंदरता को बचाये रखे |
आओ मिलकर इस प्यारी धरती को पेड़ो, पहाड़ो, नदियों से, सजाये रखे |
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