Tuesday, September 1, 2020

बिलासपुर से सावित्री यादव "सावि " की रचना- प्रकृति का महत्व

विधा _ उत्प्रेक्षा  अलंकार 
विषय _वनांचल  में शिक्षा  का महत्व 
रचनाकार _सावित्री यादव "सावि "
             बिलासपुर   छ.  ग. 
             
             
             शीर्षक _ प्रकृति का महत्व और शिक्षा 
             
जंगल की हरियाली देख मन ऐसे खुश होता  है | जैसे 
क़ोई सल्तनत  मिल गईं हो जहाँ  सिर्फ  मेरे मन का हो  रहा हो  |

लगे मन ऐसा झूमने जैसे क़ोई सपना पूरा हुआ हो |
मोर पपीहा कोयल सब जैसे अपने साथी बने हो 

कल कल करती  नदी मानो क़ोई गीत गा रही हो |
और पूरा वातावरण उसके गीत को चुपचाप सुन रही  हो |

जंगली फूलों से लदी  जंगल के पेड़ पौधे  मन को मोह ले रहे |
लग रहा जैसे किसी ने प्यारी सी रंगोली बना दी हो |


टेड़े  मेढे  रास्ते  और पहाड़ो की सुंदरता देख|
ऐसा लग रहा हो जैसे कुदरत ने बड़े जतन से इसे बनाया है| |

शाम को घर को ओर  लौटते  लोग उनके हाथो में  जंगली  जड़ी , बूटी, फल लिये होते है | |
और खुश ऐसे होते है  | वो जैसे  क़ोई खजाना  ला रहे हो |

बच्चों को इस प्रकृति  के महत्व समझा  उन्हें , 
उन्हें प्रकृति की सुंदरता से अवगत करवाए ऐसा क़ोई पाठ पढाये |

आओ मिलकर प्रकृति की सुंदरता को बचाये रखे |
आओ मिलकर इस प्यारी धरती को पेड़ो, पहाड़ो, नदियों से, सजाये रखे |


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