Sunday, August 30, 2020

गरियाबंद जिले के होनहार छात्र फणीष कुमार पटेल ने बनाया प्रकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए मॉडल Faneesh Kumar Patel, a promising student from Gariaband district, created a model to deal with natural disasters.



गरियाबंद जिले में अध्ययनरत् छात्र फणीष कुमार पटेल ने बनाया है प्राकृतिक आपदाओं के दौरान होने वाले पुल को नुक्सान से बचाने के लिए अत्याधुनिक मॉडल, इस मॉडल के संदर्भ में बताते हुए फणीष कुमार पटेल ने कहा- हमारे देश भारत में भौगोलिक कारणों से वा मुख्य वर्षा ऋतु के कारण प्रायः बाढ़ भूकंप भूस्खलन  जैसे प्राकृतिक आपदा आते हैं | विशेषकर भारत के उत्तरी क्षेत्र हिंदू धर्म तीर्थ स्थल जैसे केदारनाथ ,बद्रीनाथ एवं गंगोत्री, यमगोत्री बाढ़ आते रहते हैं| इन क्षेत्रों में बाढ़ आने से तीर्थयात्री जो मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं ,वह बाढ़ ,भूस्खलन ,भूकंप के कारण पुल टूट जाने से दूसरे छोर पर फंसे रह जाते हैं तथा उस समय आपदा कि समय उन्हें हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू करने में कठिनाई आती है एवं समय पर खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य सेवा ना मिलने के कारण लाखों करोड़ों की मौत भी हो जाती है | उनके अलावा मैदानी क्षेत्रों में जब उत्तर भारत जैसे गंगा, यमुना, कोसी,घाघरा अपनी पूरी उफान में रहती है | जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्र में बनाएं गए पुल टूट जाते हैं तथा लोगों को स्वास्थ्य सेवा एवं खाद्य सेवन नहीं पहुंचने के कारण अनेक परेशानी का सामना करना पड़ता है| इन सभी समस्याओं को देखते हुए मैंने एक ऐसे प्रणाली का निर्माण किया है, जिसके माध्यम से आसानी से पर्वती मैदानी क्षेत्रों में पुल निर्माण किया जा सकता है और लोगों को बचाया जा सकता है | इसे बनाने में पासकल की किस सिद्धांत का प्रयोग किया गया है|
                इस प्रणाली की  बनावट काफी हद तक एक ट्रक के सामान से मिलती जुलती है| इस प्रणाली में हाइड्रोलिक पंप हाइड्रोलिक ऑयल एवं विद्युत मोटर लकड़ी का डोपर एवं सीरीज एक विद्युत बैटरी सोलर पैनल आदि इस प्रणाली के ऊपर सिरों में हाइड्रोलिक हाइड्रोलिक पंप से जिसमें टैंक से जुड़ा पंप को चलाने में हाइड्रोलिक पंप द्वारा उत्पन्न किया जाता है| इसके दबाव को एक पाइप के माध्यम से ऊपर से नीचे ले जाया जाता है| उसके नीचे जुड़े हुए पुल गोल लपेटने के रूप में लगे होता है दाब लगाने के पश्चात आगे पुल के रूप में निर्माण कर लेता है, इस प्रणाली के मध्य भाग एक खोखला भाग होता है, जिसके माध्यम से फंसे लोगों को बाहर निकाला जाता है इस प्रणाली में अत्यंत सरल रूप से डिजाइनिंग किया गया है ,इसका निर्माण आसानी से किया जा सकता है और लोगों को आपदा एवं बाढ़ से फंसे लोगों को बचाया जा सकता है|

 इस प्रणाली से लाभ :-
 इस प्रणाली के बन जाने से सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अतिवृद्धि भूस्खलन के कारण जो लो दूसरे छोर पर फंसे हो उन्हें इस प्रणाली के सहायता से आसानी से  बचाया जा सकता है| इसके अलावा मैदानी क्षेत्रों में अगर पुल टूट जाता है तो ग्रामीण को आसानी से इस प्रणाली को प्रयोग करके स्वास्थ्य ,सेवा एवं खाद्य सेवा पदार्थ की सुविधा प्रदान किया जा सकते हैं| इसे चलाने में कम शक्ति की आवश्यकता होती है| इसे एक छोटे इंजन के रूप में संचालित किया जा सकता है| इस प्रयोग में ध्वनि कम उत्पन्न होती है| उठाए गए सामान पर जरा भी झटका नहीं लगता गाड़ी के सबसे बड़ी विशेषताएं यह है ,कि यह  सोलर पैनल द्वारा ऊर्जा एवं बैटरी में संचय करके चलाया जा सकते हैं |इस प्रकार मशीन  से पर्यावरण कोई भी नुकसान नहीं होता और आपातकालीन स्थिति में अत्यंत उपयोगी मशीन है| 

                     फणीष कुमार पटेल
                     अध्ययनरत् छात्र
               जिला:- गरियाबंद, छत्तीसगढ़

4 comments:

  1. बहुत बढ़िया फनिस गरियाबंद अउ आईएसबीएम वि वि के नाम ला गौराण्वित कर देव

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