नाम-दिनेश चंद्र प्रसाद "दीनेश"
राज्य-कलकत्ता पश्चिम बंगाल
विषय-खुदी राम बोस
शीर्षक-"हँसते हँसते चढ़े जो फाँसी"
युवाओं में भर देते थे जो जोश
वो थे सबके प्रिय खुदीराम बोस
माता लक्ष्मीप्रिया पिता त्रैलोक्यनाथ
बचपन में ही हो गए थे वो अनाथ
तीन मुट्ठी चावल दे दीदी ने खरीदा
इसलिए नाम खुदी(चावल) राम
जन्म स्थान बंगाल का मेदिनीपुर
जिला के गॉंव हबीब पुर
पैतृक गावँ बहुवैनी गाँव
मुजफ्फरपुर में मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड
को मारने हेतु फेंके थे बम
पर मरे नहीं मजिस्ट्रेट किंग्सफोर्ड
पत्नी बेटी हो गई बेदम
११ अगस्त १९०८ को
१६ साल छः महीने और ११ दिन का
किशोर हँसते-हँसते चढ़ा फाँसी तख्त
अंतिम इच्छा पूछी गई तो बतलाया
मैं बम बनाता बहुत अच्छा
मरने से पहले सभी भारतीयों को
इसे सिखलाना चाहता
स्तब्ध हो गया न्यायधीश
इस बात से पूछा डरते नहीं
खुदीराम बोले -" मैंने गीता पढ़ी है
मुझे मृत्यु से कोई भय नहीं"
तो ऐसे थे हमारे खुदीराम बोस
जिनके भस्म भी भरते थे लोगों में जोश
बनने लगी उनके नाम की धोती
जिसे खरीदने के लिए होड़ मचती
पूसा रोड रेलवे स्टेशन है अब उनके नाम
"दीनेश" ऐसे वीर सपूत को करता है प्रणाम
No comments:
Post a Comment