नाम- अन्जना झा
जिला- गौतम बुद्ध नगर ,नोएडा
विधा-कविता
शीर्षक- नया भारत
"21वीं सदी भारत से, अवगत मैं तुम्हें कराती हूँ।
तो नमस्ते, वड़क्क्ं, आदाब से भारत के भिन्न-भिन्न रूप तुम्हें दिखाती हूँ।
कहने को रूप अलग हैं, ढंग अलग हैं।
पर सब से मिलकर बनती भारत की शोभा सारी है
अनेकता में एकता से लगती है भारत भूमि अम्बर से भी प्यारी है।"
"शून्य की खोज जिस भारत ने की क्यों समझते हो उसे आधा।
ये तन- तपोवन की भूमि जहाँ अवतार हुए कई ज्यादा
जहाँ गीत की धारा बहती और रामायण है गाया जाता
ये देश है मेरा भारत, जहाँ गूँजे हम भारतीयों का नारा।"
" भिन्न-भिन्न पर्वों से सजता देश हमारा
तो 'वसुदेव कुटुंबकम' से सुशोभित देश हमारा।
कहीं बंगाली, कहीं पंजाबी तो कहीं मुस्लिम बसता है।
ऐसे ही भिन्न्न-भिन्न प्रांतों से देश हमारा सजता है।"
" अपने इस धरोहर को आज हम बचाएँगे
इंसानियत, उदारता, एकता, धर्मनिरपेक्षता अपनाएंगे
तो समता, समन्वय , सदाचार से आज इसे अक्षुण्ण
bahut khubsurati se varnan kia hai aapne..
ReplyDeletejai hind..jai bharat🇮🇳🇮🇳
Wow.. bhaut khuub..
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