कवयित्री - प्रीति चौधरी "मनोरमा"
जिला - बुलन्दशहर
राज्य - उत्तरप्रदेश
शीर्षक -खुदीराम बोस
तीन दिसंबर अठारह सौ नवासी में जन्म हुआ खुदीराम बोस का,
स्वतंत्रता के आह्वान का, स्वाधीनता के उद्घोष का,
सबसे कम उम्र के युवा क्रांतिकारी थे बोस जी,
इनके सौजन्य से दौर आया नव क्रांति के जोश का।
मात्र उन्नीस साल की उम्र में फाँसी पर चढ़ गए,
स्वाधीनता की खातिर अंग्रेजों से लड़ गए,
देश के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी,
बलिदान और त्याग का इतिहास गढ़ गए।
वर्ष उन्नीस सौ आठ था, थी ग्यारह अगस्त,
जिस दिन पराक्रम का यह रवि हुआ था अस्त,
जिस आयु में युवा देखते हैं स्वर्णिम स्वप्न,
उस उम्र में अंग्रेजों के मंसूबे किये थे ध्वस्त।
सिंह की भाँति निर्भीक थे, वीरों के भी वीर,
इनके अटल इरादों को क्या रोके कोई प्राचीर?
नमन है इनके शौर्य को,धन्य है इनकी जवानी,
स्वतंत्रता के हवन में अर्पित कर दिया शरीर।
कोटि -कोटि करते हैं हम इनका वंदन,
इनके शोणित से सिंचित है भारत चमन,
खुदीराम बोस जी जैसे महान व्यक्तित्व को,
शब्द प्रसूनों से करते हैं हम आज आचमन।
प्रीति चौधरी "मनोरमा"
जनपद बुलन्दशहर
उत्तरप्रदेश
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