संबलपुर, कांकेर,( छ.ग.)
विषय- *याद*
शीर्षक :- *अटल बिहारी बाजपेयी*
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*अटल बिहारी बाजपेयी*
आओ फिर यादों
का दिया जलाएं,
महामानव,प्रखर नेता को
श्रद्धा के फूल चढ़ाएं।
रोती है वसुधा,
पुकार रही धरा,
भरी नजरों में लिए
करुणा रही निहार।
शिखर का उत्कर्ष हो
या अपकर्ष,
ना जीत का हर्ष
ना हार का द्वंद,
ऐसे अटल को रही पुकार।
वो ओजपूर्ण आनन,
शौर्य से भरा मन,
जीवन के झंझावातों में भी
सदा रहे मगन।
अटल नाम था,
उनके थे अटक इरादे,
उनके व्यक्तित्व के
समक्ष सब थे आधे।
बहुआयामी व्यक्तित्व
के थे मालिक,
युग निर्माता,वक्ता थे
कवि ह्रदय थे काबिल।
कहते रहे सदा-"क्यों मैं
क्षण-क्षण में जियूँ।
कण-कण में बिखरे
सौंदर्य को पियूं।
युग पुरूष,कारगिल
विजेता को करें नमन,
पोखरण में इतिहास रचने
वाले तुम्हारा अभिनन्दन।
आओ फिर यादों
का दिया जलाएं,
महा मानव प्रखर नेता को
श्रद्धा के फूल चढ़ाएं।
व्याख्या-प्रस्तुत कविता में भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी को याद करते हुए उनके शौर्य, साहस आदि का वर्णन किया गया है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)
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