Tuesday, August 4, 2020

जांजगीर चांपा से कवियित्री रंजना मखीजा जी की कविता- दिल का रोना

कवि.. रंजना मखीजा
स्थान  जांजगीर चांपा
विषय*दिल का रोना*

अलामत दिख नहीं पाई ,मगर ये दिल का रोना है
मेरे जख्मों को ए दिलबर, तेरे अश्कों से धोना है
कभी जो राह दिल से तुम अगर ,गुजरो तो ये जानो
बड़ा टूटा हुआ मायूस ,दिल का ये खिलौना है।

 मुकम्मल हो नहीं पाई मोहब्बत ,तो क्यूं रोना है।
किसी को याद करके  क्यूं ,पलकों को  भिगोना है,
जो रब ने दे दिया तुमको ,करो उसका ही शुक्राना,
गुजरते वक़्त की यादों में ,खुद को क्यूं डुबोना है।
  
रही होगी वजह कोई,ना रखी होगी यूं दूरी,
अगर तुम बात जो जानो ,तो समझोगे वो मजबूरी।
तेरे ही प्यार की बारिश से सींचा है गुलिस्तां ये,
तेरा ही है ये सब जादू, तेरा ही सब ये टोना है।

   सुनहरे यादों के साए कभी जो पास आते है,
तेरी तस्वीर जाने क्यूं ये नैना यूं बनाते हैं।
भुला दो बीते हुए कल को तो जीना सीख जाओगे ,
जियो जिंदादिली से तुम ,बिना वजह क्यूं रोना  है।
  अलामात दिख नहीं....

रंजना मखीजा
अकलतरा

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