Tuesday, August 4, 2020

नरसिंहपुर, मध्यप्रदेश से कवयित्री श्रीमती गायत्री ठाकुर"सक्षम"जी की कविता-मत आना भैया

कवियित्री- श्रीमती गायत्री ठाकुर "सक्षम"
नरसिंहपुर, मध्यप्रदेश
 शीर्षक-*मत आना भैया*
 विधा -कविता
             *मत आना भैया*
दो शब्दों का है,अनुपम संयोजन,
नाम है प्यारा जिसका रक्षाबंधन।
 दुलारी बहना की रक्षा  के लिए,
भाई बंधवाता है यह  न्यारा बंधन।

बहना भी है, आशीषें देती,
 खुश रहे, फूले फले सदा।
 मेरे भाई का प्यारा परिवार,
कोई संकट करे न उस पर वार।

इस बार विनती, करती है बहना,
भाई आज मेरे घर,तुम मत आना।
संक्रामक वायरस को, हमें रोकना,
पीड़ित है कोरोना से सारा जमाना।

 अगले बरस जब हम आएंगे,
  मिलकर खूब धूम मचाएंगे।
  दोनों बरसों का ही मजा तब ,
  जमके,हम सब मिल उठाएंगे।

 वीडियो कॉलिंग के द्वारा इस बार,
रक्षाबंधन की रीति हम दोहराएंगे।
अपने अंतर्मन की आंखों से भैया,
रक्षा सूत्र बंधते हुए,हम दोनों देखेंगे।

तुम देना आशीष मुझे तब भैया,
मैं ढेर बलैंयाँ ,तुम्हारी ले लूंगी।
ईश्वर से विनती करके मैं भैया,
 सलामती भी,तुम्हारी मांग लूंगी।

 श्रीमती गायत्री ठाकुर "सक्षम"
 नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश

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