जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---छंद मुक्त कविता(उपमा अलंकार पर आधारित)
शीर्षक ---जय जय कृष्ण
व्याख्या ---कवि के द्वारा श्री कृष्ण का अवतारी पुरुष के रुप में गुण गान एवं धरा पर मनुष्यों के उपकार में किते कार्यों का वर्णन किया गया है ।
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जय जय कृष्ण
जय जय कृष्ण,जय नंदलाल ।
बांके बिहारी ,जय गोपाल ।
इस धरा पर ले अवतार ।
आते प्रभु तुम बार ही बार ।
सज्जन दुर्जन ले शरण में ।
करते सभी का पाल ।
सत्य धर्म का साथ तुम्हारा ।
अन्याय अधर्म तुमसे हारा
पाप मिटाने धर्म जगाने ।
कृपा तुम्हारी हम पर विशाल ।
लीला तुम्हारी पग पग अदभुत ।
जगत स्वामी तुम कहाते सुत ।
सुख पहुंचाने कष्ट भगाने ।
क्षण क्षण करते कमाल ।
मेघ समान तुम श्याम हो ।
त्रेता के तुम्हीं राम हो ।
सूरज चांद तुमसे प्रकाशित ।
तुमसे श्वेत अरु लाल ।
गंगा जल सम तुम उपकारी ।
पावत शरण तरत नर नारी ।
हर जन्म मोहे शरण में लीजो ।
जैसे करे मां शिशु देखभाल ।
गिरधारी लाल चौहान
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