जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
शीर्षक - " कृष्ण जन्माष्टमी "
विधा - छंदमुक्त कविता
अलंकार - उपमा अलंकार
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जन्मदिन आज नटखट कृष्ण का,
जन्मे थे गोपाला जी।
मनमोहना कान्हा, बंशी बजोइया,
गायों का ग्वाला जी।।
मुखमंडल चमके जैसे सूरज,
फूलों-सी मुस्कान है।
श्याय रंग की काया उसकी,
बहुत शोभायमान है।।
कमल-सा कोमल चरज उनके,
चरणों में सारा संसार है।
मृगनयनी-सी आँखें उनकी,
रुप दिये बहुत निखार है।।
माथे पे मोर पंख शुशोभित,
जैसे सुन्दर हो चित्रकारी।
गोपियों का मन हरने वाला,
मेरा कान्हा बाँकेबिहारी।।
बचपन बिता माखन चुराने में,
पनघट पे मटकी जो फोड़ते थे।
मनमोहना मुरारी प्रेम के धागों से,
सबके दिल को जोड़ते थे।।
राधा का मन हरने वाला,
ओ चितचोर है।
प्यार की धून सुनाने वाला,
हर तरफ प्रेम का शोर है।।
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उपमा अलंकार का प्रयोग :-
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1. मुखमंडल - सूरज
2. मुस्कान - फूल
3. चरज - कमल
4. आँखे - मृगनयनी
5. मोर पंख - चित्रकारी।
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जय श्री कृष्ण🙏🙏🌺🌺🌼🌼
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