Friday, August 14, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- स्वतंत्रता दिवस

रचनाकार-मीरा आर्ची चौहान
जिला- कांकेर,छग
शीर्षक- स्वतंत्रता दिवस
विधा-कविता मुक्त छंद


स्वतंत्रता दिवस की
 झांकी कहती
आजादी अभी 
अधूरी है।

कुछ अशिक्षा का
लहर चला,
कुछ गरीबी की
मजबूरी है।

आधी आबादी 
भूखी-प्यासी,
झूठे वादे निभाये
जाते हैं।

नारी सशक्तीकरण
 की बात कहां,
वो घूंघट में
मुखड़ा ढांपे है।

कुछ अज्ञानता का
दौर चला,
कुछ रुढ़ियों की
मजबूरी है।

कागज पर बनते
सड़क और बांध।
यही जनतंत्र
कहलाता है।

भाषण नारों पर
रोटी बनती,
भूखा बच्चा
अकुलाता है।

आओ मिलकर
शपथ लें,
ऐसा स्वतंत्रता दिवस
मनायेंगे।

दे भूखे बच्चों को
रोटी , अनपढ़ को
शिक्षा , सूराज का
तिरंगा फहरायेंगे।।

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर, छग
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