Thursday, August 27, 2020

रायगढ़ से उर्मिला सिदार की रचना- प्रकृति

रचनाकार- उर्मिला सिदार
ग्राम -बुलाँकी
जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
विधा -कविता 
शीर्षक- "प्रकृति" मानवीयकरण
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 हे प्रकृति तेरी ही  कृति,
 तू समृद्धि अद्भुत सृष्टि।

 घुंघराले घनश्याम केशपाश,
 चांदनी चांद बिंदिया चमकात।

 चमक दामिनी आभा आनन,
 विचरण तीव्र गिरि कानन।

 हरियाली परिधान सुशोभित,
 लोहित लब नैना कजरारे छवि।

 कल कल हिमालय मुकुट,
 नील अंबर देह स्वरूप ।

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 उर्मिला सिदार रायगढ़ छत्तीसगढ़

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