रायगढ़,छत्तीसगढ़
विषय-स्वदेशी (अननव्य अलंकार)
विधा-छंद मुक्त
शीर्षक- संस्कारों का सम्मान
हमारे संस्कार सा संस्कार नहीं
ना हमारी संस्कृति सा संस्कृति है
हमे नाज है अपने हिंदुस्तान पर
क्योकि जग में दूसरा हिंदुस्तान नहीं
गर स्वदेशी खाना ही हम खाएं
रोग-दोष हमारे निकट ना आएं
हमारे भाषा -बोलियों में प्यार
अपनापन और एकता है झलकता
हमारे वस्त्र-परिधान हैं खूबसूरती
की परिभाषा जिसमे सिमटी है
संस्कार और हया की आभा
हमारी प्रकृति हमारी पहचान बने
आओ आजादी को आजाद करें
स्वदेशी हैं स्वदेशी का सम्मान करें
निज देश की संस्कृति और गौरव का
आज सब मिलकर गौरव गुणगान करें।
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