Wednesday, August 12, 2020

महासमुन्द से द्रोपती साहू "सरसिज" की रचना- अतुलनीय भारत

कवयित्री-द्रोपती साहू "सरसिज"
जिला-महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक;"अतुलनीय भारत"
विदा-कविता(तुकांत)
अलंकार-अनन्वय अलंकार

            *****
संस्कारों का देश हमारा,
कहलाता है यह विश्वगुरू।
शुन्य की खोज चाहे योग,
पहले हुआ था यहीं शुरू।।

संस्कारों में न इनका जोड़,
अद्वितीय राष्ट्र है यह अपना।
अद्भुत है भौगोलिक रचना,
पूरा होता है यहाँ हर सपना।।

पशु पक्षी नदी नारी तरू,
सभी यहाँ पर पूजे जाते हैं।
देव तुल्य स्थान है इनका,
ऐसा कहीं न देखे जाते हैं।।

अतुलनीय और विश्वसनीय,
जीवन मूल्य आधार होता है।
उपकारों पर आभार जताते,
सम्मान देकर प्रणम्य होता है।।
          

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