ग्राम - बुलाकी
जिला - रायगढ़ छत्तीसगढ़
विधा - कविता
शीर्षक - ग्रामोदय
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*ग्रामोदय*
गांव का मेरा विकास हो।
जन-जन खुशहाल हो।
द्वार-द्वार जगमग जले।
ऐसा संस्कारिक मेरा गांव हो।
गांव का मेरा विकास हो..........
(2)
जन-जन में ज्ञान का उदय हो।
घर परिवार में समृद्धि का भाव हो।
समाज में मानवीयता व्यवहार हो।
प्राकृतिक संतुलन मेरा गांव हो।
गांव का मेरा विकास हो.........
(3)
संबंध-संबंधों में प्रेम भाव है।
भाईचारा और सद्भाव हो।
मन तन धन का सदुपयोग हो।
ऐसा मेरा गांव हो।
गांव का मेरा विकास हो...........
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व्याख्या:- इस कविता में कवित्री अपने गांव की विकास की कामना की है।
विप्सा अलंकार :- संबंध-संबंधों
जन-जन
द्वार-द्वार
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उर्मिला सिदार
रायगढ़(छ.ग.)
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