Thursday, August 6, 2020

रायपुर से देवयानी शुक्ला की रचना- गांव

01. रचनाकार का नाम :
देवयानी शुक्ला
02. जिला :- रायपुर (छत्तीसगढ़) 
03. छंद :- मुक्तक(वीप्सा अलंकार) 
04. रचना का शीर्षक :-

*गांव-गांव चलें*

पुलिंदे यादों के उठा के
गांव-गांव चलें ,
हरे खेतों 
भरे खलिहानों तक
पांव-पांव चलें ।

ये जो दिखती है 
सड़क-सी
सड़क ही थी ये कभी ,
विकास पेंच-पेंच आया
दांव-दांव चले ।

शहर की बदहवा से इसको हम बचा ना सके ,
दरख़्त कट गये ,
अब किसकी छांव-छांव चलें ?

रोटी-रोटी की 
रट लगाते हुए ,
शहर में मारे-मारे 
गांव ठांव-ठांव चले ।

खुशहाली आएगी ;
हालात भी अच्छे होंगे ,
मशाल ले के बशर्ते 
सभी उमराव चलें ।।
___________________

*उमराव* :- अमीर,कुलीन जन

*वीप्सा अलंकार*
गांव-गांव
पांव-पांव
दांव-दांव
छांव-छांव
ठांव-ठांव
रोटी-रोटी
मारे-मारे

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