जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
शीर्षक - " ग्रामोदय हेतू प्रयास "
विधा - छंदमुक्त कविता
अलंकार - विप्सा अलंकार
-------------------------------
सौंधी-सौंधी ओ गाँव की मिट्टी,
मानो मुझे बुला रही है।
कल-कल करती नदी की धारा,
मन मेरा लुभा रही है।।
पल-पल मुझे सताती है,
गाँव की खट्टी-मीठी यादें।
सरल सरस गाँव के लोग,
समस्याओं की सारी बातें।।
पहिया गाँव के विकास का,
धीरे-धीरे बढ़ रहा।
पक्की-पक्की सड़कों पर,
गाँव का बालक चल रहा।।
प्रधानमंत्री आवास योजना से,
निर्माण मकान का हो रहा।
टप-टप टपकती छत का,
समाधान भी अब हो रहा।।
स्कूल बने गाँव-गाँव में,
शिक्षा का विस्तार हुआ है।
घर-घर पहुँचा नल का पानी,
जागरूक सरपंच हमारे युवा है।।
फसलों का भी पैदावार बढ़ा है,
नई-नई कृषि तकनीकों से।
जीवन स्तर भी उच्च हुआ है,
पुराने जीने के तरीकों से।।
बहु बेटी की इज्ज़त बढ़ गई,
हर घर शौचालय का निर्माण हुआ।
बाहर शौच न जाते अब लोग,
गंभीर बिमारियों का निदान हुआ।।
सिंचाई की समस्या भी दूर हुई,
पानी नहर से पहुँचने लगे हैं।
फसलों का ये रक्त बनकर,
नस-नस में बहने लगे हैं।।
हर घर हुआ बिजली से रौशन,
खुशियों की प्रकाश फैलने लगी है।
चिकित्सा सुविधाओं का भी हुआ विकास,
मितानिन बच्चा-बच्चा तक पहुँचने लगी है।।
------------------------------
विप्सा अलंकार का प्रयोग :-
------------------------------
सौंधी-सौंधी, कल-कल, पल-पल,
धीरे-धीरे, पक्की-पक्की, टप-टप,
गाँव-गाँव, घर-घर, नई-नई,
नस-नस, बच्चा-बच्चा।
-------*****-------
Supar��
ReplyDeleteBahut sundar,👌👌👌👍👍
ReplyDelete