जिला :- महासमुंद
विषय :- याद
विधा :- छंद मुक्त कविता
शीर्षक :- मीठी मीठी प्यारी याद।
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तन्हाई में गहराती जो,
काली काली रात सुहानी।
नयनों में चलचित्र की भांति,
चल पड़ती है याद पुरानी।
गुजरे हुए कुछ लम्हें फिर फिर,
भर जाते हैं मन में उन्माद।
फिर से वहीं जीवन हो जाता,
स्मृति पटल पर आबाद।
उर के तारों को झंकृत करता,
बजने लगता मनोरम राग।
मन जलता भी, और खिलता भी है,
मानों लगी हो सावन में आग।
खट्टी मीठी जज्बात लिए है,
अंतर्मन का यह संवाद।
शब के सन्नाटो में सदाबहार होती,
मीठी मीठी प्यारी याद।
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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने सन्नाटे में मन में कौंधने वाली मीठी व प्यारी यादों का वर्णन किया है।
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