स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- छंदमुक्त कविता
शीर्षक -"यादों का पुलिंदा"
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यादों का पुलिंदा बाक़ी है
मेरे जहन में
तेरी हंसी अभी बाक़ी है
मेरे लबों में।
छोड़ चले गए मुझे
तुम तो क्या
तेरा वजूद अभी बाक़ी है
मेरे जीवन में।
जल जाते हैं हम
जलाने से तेरे
तेरी अगन अभी बाक़ी है
मेरी जलन में।
छीन नहीं सकता तुम्हें
मुझसे कभी कोई
तेरी ख़ुशबू अभी बाक़ी है
मेरे बदन में।
चाहे जहां देखूँ मैं
तुम ही तुम हो
तेरा अक्स अभी बाक़ी है
मेरे सदन में।
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