Wednesday, August 5, 2020

रायगढ़ से उर्मिला सिदार की रचना- जय श्री राम

रचनाकार  - उर्मिला सिदार
 ग्राम - बुलाँकी
 जिला - रायगढ़( छत्तीसगढ़)
 विधा -कविता (मुक्तक छंद)
 शीर्षक-  "जय श्री राम"
 
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           जय श्री राम
 हे !
 मर्यादा पुरुषोत्तम राम,
 मर्यादा है तेरी पहचान ।
 तेरी मर्यादा का जग सारा ,
 करते हैं ,आदर सम्मान।
हे!  मर्यादा........

माता -पिता का वचन निभाया, गुरुओं का किया सम्मान, राजभोग त्याग कर प्रभु जी,  लोगों का किया कल्याण।
हे!  मर्यादा..............

कौशल्या नंदन राम लला,
अरूण सी कर्म किया अपार।     जन -जन का कल्याण हेतु ,
वन अंचल किया प्रस्थान।
हे!  मर्यादा.............

ऋषि यों का मान रख कर, दानवों का संहार किया ।
धर्म रक्षार्थ हेतु तूने ,
धनुष बाण प्रयोग किया।

 हे !मर्यादा............
 ऊँच-नीच का भेद नहीं 
 सभी से तुम्हारा नाता था ।
 केवट को मित्र बना कर तूने ,
 हृदय से गले लगाया था।
हे ! मर्यादा.............

अहिल्या का उद्धार कर ,
भक्तों पर उपकार किया। 
शबरी के प्रेम में डूब कर प्रभु,  प्रेम का जग में इजहार किया  । 
हे  मर्यादा..............

दुश्मन का भी सम्मान किया,       रावण को दिया कफन ।
मर्यादा का मान रख कर,
किया आत्म सम्मान।
हे ! मर्यादा................

 जय हो सदा विजय हो,
 श्री राम तेरी धरा पर।
 जग में जन -जन  मंगल गाएंँ,
 तेरी भूमि पूजन अवसर पर।
हे!  मर्यादा..............

क्या गुण गान करूँ मैं तेरा,
गुणों से भरा है अपार।
तेरी आचरण की बू प्रभु,
महक जाए संसार। 
हे!  मर्यादा..................   

अनलअनुराग श्री रामचंद्र जी,    बसे हैं ,अनल आत्म स्वरूप।
 विनय करी हाथ जोड़ी मैं, 
 करूँ  बंदन  तोहे  अनुरुप।
 हे!  मर्यादा.................


                   उर्मिला सिदार
                   

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