जिला - बलौदा बाजार ( छ. ग. )
विधा - कविता ( प्रतीप अलंकार )
शीर्षक - राम भजन
राम नाम की माला निशदिन ,
शाम - सबेरे जपना है ।
ध्यान भजन सत्कर्म की पूंजी ,
लेकर साथ में चलना है ।।
जीवन है दिन चार जगत में ,
पीछे तू पछतायेगा ।
धन-दौलत और कुटुम्ब-कबीला ,
कोई काम न आयेगा ।।
मतलब की दुनिया मे आकर ,
खूब सँभल के रहना है ।
ध्यान - भजन.......।।1।।
बीती जाय उमरिया यूँ ही ,
हरि भजन बिन बावरे ।
यमदूतों की मार पड़ेगी ,
घोर नरक में वास रे ।।
विमल विवेक जगाओ प्यारे ,
पाप कर्म से बचना है ।
ध्यान - भजन.......।।2।।
राम नाम तो पारसमणि से ,
अधिक मूल्य का धन है ।
पारस तो पत्थर है भैया ,
नाम अलौकिक रतन है ।।
राम नाम की गठरी बाँधो ,
भवसागर से तरना है ।
ध्यान - भजन.......।।3।।
मीरा ध्रुव प्रह्लाद अजामिल ,
केवट शबरी पार हुए ।
राम नाम से पापी जन भी ,
ईश्वर के दरबार गए ।।
हरेक श्वास में अखण्ड सुमिरन ,
राम नाम ही रटना है ।
ध्यान - भजन.........।।4।।
देवों से भी ज्यादा कीमती
मानव देह मिला है ।
लख चौरासी से बचने का ,
दुर्लभ अवसर निकला है ।।
धर्म शास्त्र सद्गुरु अनुसार ,
केवल प्रभु को भजना है ।
ध्यान - भजन........।।5।।
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