रचनाकार-एच-एस-अरमो ,अरमान ।
निवास-रायपुर ।छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक- "" श्री गणेश ""
विधा- छंद-मुक्त (कविता)
श्री गणेश
मैं हूँ,सँसार की अनूठी कृति,
पौराणिक दन्त कथाओं में
हूँ मैं "श्री गणेश "-------
प्रथम पूजन का हक,
मैंने,अपने कृत्यों से है पाता,
मुझ जैसा,सँसार में---
कोई ना दूजा,
मैं हूँ,बुद्धि का प्रदाता ।।
मैं राक्षसों के "दाँत खट्टे होना" तक,
उनका समूल विनाश ,हूँ करता ,
मैं हूँ,सबका दुःख हर्ता,
सबका मंगलकर्ता,
मैं हूँ,"श्री गणेश " ।
मेरी सूरत ,जैसी भी हो,
पर,बुद्धि का,हूँ मैं ज्ञाता,
मेरा उदर है,बड़ा तो क्या हुआ,
हर मुश्किलों को हजम,
आसानी से,जो मैं कर जाता ।।
मेरा शरीर है,भारी,
फिर भी,मूषक है,मेरी सवारी,
है न ,देखो कितनी अनोखी,
पर,जगत में,है एक ही नामी ।।
सारे जगत का स्वामी,
अपने भक्तों का, करता रखवाली,
श्रद्धालुओं के,हर नये कामों का,
करता मैं,सदा "श्री गणेश "---।।
व्याख्या-उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि "श्री गणेश "सबके कामों का हरदम करते "श्री गणेश "।
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