ग्राम -बुलाँकी
जिला- रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
विधा -कविता
विषय- याद (मुक्तक छंद)
शीर्षक -"यादें"
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*यादें*
आते हैं यादें उन महात्माओं की,
जिन्होंने जीवन में कुछ उपकार किया।
सार्थक जिंदगी जी कर उन्होंने,
दलित समाज का उद्धार किया।
समझा- समझाना जाना उसने,
भ्रमित ना समझ इस दुनियाँ में।
दिया है स्नेह मानव को उसने,
मानवता में जीना सीखलाया है।
कुछ समझ और ना समझ,
मानव बहुत है जग में।
समझदार थे इन मानकों में वे,
जग का मानव यही कहता है।
गए नहीं है इस जग से वे,
ब्रह्मांड में वे समाएँ हैं।
परिवर्तन हुआ है बस रूप
उनका,
जीवन तो वही,पाएँ हैं।
समझना और समझाना सबको,
सुख बाँटने थे जीवन में।
याद करें आचरण उनकी,
प्रेरित मन प्रफुल्लित हो जाता है।
अदृश्य हुए हैं स्थूल रूप से,
पर भाव स्वरूप में पास रहते हैं।
अनुपम मनु थे वे इस प्रकृति के,
मानव समाज यही कहता है।
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व्याख्या:- इस कविता में जो मानव अपनी जिंदगी को सार्थक कर मानव कल्याण के लिए कार्य किए हैं उनकी यादों का वर्णन किया गया है। वह शरीर रूप में वर्तमान में नहीं है लेकिन उनकी भावनाएं आज भी हर मानव के पास भाव स्वरूप अर्थात आचरण के रूप में समाहित है।
वर्तमान समाज में यही उनकी यादें हैं इन्हीं यादों के सहारे मनुष्य मानवता के साथ समाज में सुख शांति के साथ जी सकता है।
उर्मिला सिदार रायगढ़ छत्तीसगढ़
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