जिला - बलौदा बाजार ( छ . ग. )
विधा - कविता
अलंकार - उल्लेख अलंकार
शीर्षक - जीवन के पड़ाव
जीवन मे अनेक पड़ाव हैं ,
बदलाव सहित ठहराव है ।
सुबह सुनहरा बचपन है ,
ताजा और मनभावन है ।
शिशु बालक किशोरावस्था ,
परिवर्तन की प्राकृत प्रथा ।
दोपहर की मस्त जवानी ,
राग रंग की मधुर कहानी ।
खूब कमाया की होशियारी ,
दे धमाधम दुनियादारी ।
ढलता सूरज वृद्धावस्था ,
रोग शोक चिंता की व्यथा ।
जीवन का हर क्षण परिवर्तित ,
सुख सुविधा आदत व्याधि नित ।
बचपन के प्रिय चॉकलेट-आइसक्रीम ,
वही बाद में आकर्षण हीन ।
गाँव - शहर नौकरी - धंधा ,
अच्छे नहीं जो पहले भाता ।
वही दोस्त दुश्मन रिश्तेदार ,
लगते अलग मान्यतानुसार ।
बालक युवा वृद्ध की चाह ,
भिन्न - भिन्न मन मति प्रवाह ।
अंतिम पड़ाव तो मृत्यु है ,
खेल खत्म जो हुआ शुरू है ।
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