स्थान- दुर्ग (छ.ग.)
विधा -मुक्त ,उपमा अलंकार का प्रयोग
शीर्षक - *श्याम सलोने*
नटखट कान्हा माखनचोर,
बंशी बजैया नंदकिशोर,
विष्णु अवतार द्वापर युग के,
जन्म लिया कारागार में,
वासुदेव देवकी पुत्र मथुरा के,
यशोदा मैया के दुलारे बने
नंदबाबा के आँखो के तारे
बाल सखा सुदामा संग खेले,
गोकुल में श्याम लगे धेनु चराने ।
यमुना के तट कदम्ब की डाल,
मुरली मधुर बजाये नंदलाल,
बंशी की धुन में नाचे संग गोपियाँ,
सुमन सी नाजुक राधा कृष्णप्रिया,
कमलनयनी मन ही मन जले
अब बंशीधर मथुरा को चले।
किया कंस वध,सौराष्ट्र पहुंचे,
द्वारिका नगरी बसाये वहाँ ,
तुलसी सी पवित्र मन की,
रुखमणी बनी सहधर्मिणी,
युद्ध क्षेत्र में अर्जुन के सारथी बने,
गीता उपदेश सारे जग को दिये,
जन-जन में हुये लोकप्रिय,
जगत् गुरु कहलाये विश्व में ।।
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उपमा अलंकार-
कमलनयनी
सुमन सी नाजुक
तुलसी सी पवित्र
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